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ऊर्जा का सिद्धांत -

भोजन से ऊर्जा मिलती है नींद में ऊर्जा संग्रहित होतीं है जागरण में खर्च होती है प्राणायाम से जागती है धारणा से केन्द्रित होती हैं ध्यान से ऊपर चढ़ती है भय से सिकुड़ती है वासना में नीचे गिरती है प्रेम में विस्तृत होतीं हैं समाधि में विराट के साथ एक होती है सर्वव्यापक में विलीन होती है यह ऊर्जा का पूरा एक विज्ञान है

Brahmamuhurta following Brahmacharya Lifestyle

• ब्रह्ममुहूर्त को सभी योग और ध्यान अभ्यासों के लिए सबसेशुभ समय माना जाता है। ब्रह्ममुहूर्त सूर्योदय से पहले शुरू होता है, यानी सुबह 3:20 बजे से सुबह 5:20 बजे तक। आध्यात्मिक गुरुओं का कहना है कि ध्यान करने का सबसे अच्छा समय यह है, क्योंकि उस समय मन स्वाभाविक रूप से स्थिर होता है, जिससे व्यक्ति को गहन ध्यान अवस्था प्राप्त करने में मदद मिलती है ब्रह्ममुहूर्त में सृजन की क्षमता अपने चरम पर होती है। आप वह सब कुछ विकसित और प्राप्त कर सकते हैं जो आप चाहते हैं, चाहे वो ज्ञान, फिटनेस का लक्ष्य या कोई भी कौश 

Birya kese banta hay

• आयुर्वेद के अनुसार वीर्य भोजन से बनने वाली अन्तिम धातु है । रसद् रक्तम् ततो मांसम् मांसान्मेधः प्रजायते; मेधासोस्थि ततोमज्जा मज्जा शुक्रश्य संभवः । भोजन से रस निर्मित होता है। इससे रक्त, रक्त से मांस, मांस से मेद, मेद से अस्थि, अस्थि से मज्जा और मज्जा से वीर्य उत्पन्न होता है, ये ही सप्त धातुएं हैं जो प्राण तथा शरीर को अवलम्ब देती हैं, यहाँ ध्यान दें कि वीर्य कितना बहुमूल्य है। यह अन्तिम सार पदार्थ है। यह समस्त सारों का सार है 

Swami Sivananda Ji On Brahmacharya & Concentration Power

• संयम की स्थापना से स्फूर्ति प्राप्त होती है। एक योगी पूर्ण मानसिक और शारीरिक ब्रह्मचर्य प्राप्त करके सिद्धि या पूर्णता प्राप्त करते है। ब्रह्मचर्य उन्हें दिव्य ज्ञान और अन्य सिद्धियाँ प्राप्त करने में मदद करती है। जब पवित्रता होती है तो मन की किरणें नष्ट नहीं होतीं। मन को एकाग्र करना आसान हो जाता है। एकाग्रता और पवित्रता साथ-साथ चलती है। यद्यपि ऋषि कुछ ही शब्द बोलते हैं, लेकिन श्रोताओं के मन में एक गहरी छाप पैदा होती है। यह उनकी ओजस शक्ति के कारण है, जो वीर्य के संरक्षण और इसके रूपांतरण से संरक्षित  

Nightfall ho ta kya kare

क्ति करके मन को शुद्ध करें। जप और ध्यान का सहारा लें। आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें। ब्रह्मचर्य में अपनी प्रगति का निरीक्षण करें। अपने कर्म के प्रति सचेत हो जाओ। विचार और वैराग्य का विकास करें। • बुरी संगति और बुरी बातचीत से बचें। आलस्य को त्यागकर तन-मन को सदैव किसी न किसी उपयोगी कार्य में लगायें। मन को निरंतर व्यस्त रखना ब्रह्मचर्य के महान रहस्यों में से एक है 

Bramhacharya may kya kya karna padta hay

  1. भोजन -  यदि मनुष्य सात्विक भोजन लेता है तो ब्रह्मचर्य की रक्षा करने में सरलता होती है। 2.  व्यायाम -  ब्रह्मचर्य की रक्षा और वृद्धि शारीरिक व्यायाम से होती है। शरीर में जो वीर्य उत्पन्न होता है, यह व्यायाम करने से उसकी शक्ति खून में मिलने लगती है। 3. उत्तम विचार -  यदि मनुष्य अपने विचारों को शुद्ध बना लेता है तो ब्रह्मचर्य के पालन करने में अत्यंत सरलता हो जाती है। 4.  ईश्वर भक्ति -  ईश्वर भक्ति का अभिप्राय है ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना, और उपासना। जब मनुष्य ईश्वर की भक्ति करता है तो इंद्रियों के विषय भोगों में रुचि नहीं रहती। 5. अध्ययन - उत्तम ग्रंथों के अध्ययन से ब्रह्मचर्य के पालन में सहायता मिलती है। जो ऋषियों के लिखे ग्रंथ हैं, और जिनमें ब्रह्मचर्य का वर्णन है उनके अध्ययन करने से व्यक्ति के मन में ब्रह्मचर्य के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है। और उसके विचार ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले महापुरुष जैसे बन जा